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गाँव की मिट्टी से अरबों की कंपनी तक: Lalit Keshre और Groww की प्रेरणादायक कहानी

क्या आपने कभी सोचा था कि एक साधारण-सा मोबाइल ऐप भारत में निवेश की पूरी परिभाषा बदल देगा ? जिस शेयर मार्केट को लोग जटिल , जोखिम भरा और केवल अमीरों का खेल समझते थे , उसी दुनिया को एक प्लेटफॉर्म ने इतना आसान बना दिया कि अब कॉलेज का छात्र भी आत्मविश्वास के साथ निवेश शुरू कर सकता है। यह कहानी है उस स्टार्टअप की जिसने डर को भरोसे में और उलझन को सरलता में बदल दिया। Groww ने साबित कर दिया कि सही सोच , तकनीक और विज़न के साथ आप करोड़ों लोगों की वित्तीय सोच बदल सकते हैं। प्रस्तावना भारत में एक समय ऐसा था जब निवेश को केवल बड़े शहरों और अमीर लोगों तक सीमित माना जाता था। शेयर मार्केट का नाम सुनते ही आम लोगों के मन में डर , जटिल प्रक्रियाएँ और भारी ब्रोकरेज फीस की छवि उभर आती थी। ऐसे माहौल में निवेश को सरल और सबके लिए सुलभ बनाना किसी बड़े बदलाव से कम नहीं था। इसी सोच के साथ 2016 में Groww की शुरुआत हुई। इसके संस्थापक — Lalit Keshre , Harsh Jain , Neeraj Singh और Ishan Bansal पहले Flipkart में काम कर चुके थे। उन्होंने महसूस किया कि जैसे ऑनलाइन शॉपिंग को आसान बनाया जा सकता है , वैसे ह...

स्टार्टअप से सुपरब्रांड तक: स्विगी (Swiggy) की सफलता की अद्भुत और अनसुनी कहानी



क्या कभी किसी ने कल्पना की होगी कि मात्र दस मिनट में आपका खाना दरवाज़े तक पहुँच जाएगा? बस एक फोन घुमाइए और कहीं दूर आपके लिए खाना तैयार होने लगेगा। कभी यह सोचना भी असंभव लगता था, लेकिन आज यह संभव कर दिखाया है हर्ष मजेटी ने ।  अपने पहले स्टार्टअप में असफलता के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और वर्ष 2014 में स्विगी की शुरुआत की। आज स्विगी 16 अरब डॉलर की एक विशाल कंपनी बन चुकी है। आइए जानते हैं इसकी प्रेरणादायक सफलता की कहानी।

हर्ष की पढ़ाई-लिखाई

आंध्र प्रदेश के एक डॉक्टर परिवार में जन्मे श्रीहर्ष के पिता रेस्टोरेंट व्यवसाय से जुड़े थे, जबकि उनकी माँ डॉक्टर थीं। घर में रेस्टोरेंट का माहौल होने के कारण उन्हें बचपन से ही खाने-पीने के कारोबार की समझ मिल गई। उन्होंने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, इसके बाद फिजिक्स में मास्टर डिग्री हासिल की और चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट (CFA) के सेकेंड लेवल की परीक्षा भी पास की।

श्रीहर्ष का सपना हमेशा अपना खुद का बिजनेस शुरू करने का था, इसलिए उन्होंने आईआईएम कलकत्ता से मैनेजमेंट की डिग्री भी प्राप्त की। पढ़ाई पूरी होने के बाद जब नौकरी करने का समय आया, तो उन्होंने पहले दुनिया घूमने का फैसला किया। कॉर्पोरेट जीवन में कदम रखने से पहले वे साइकिल लेकर एक अनोखी यात्रा पर निकल पड़े। इसी साइकिल से उन्होंने यूरोप का एडवेंचर ट्रिप शुरू किया और पुर्तगाल से ग्रीस तक करीब 3,500 किलोमीटर का सफर तय किया ।

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दुनिया की यात्रा पूरी करने के बाद जब वे भारत लौटे, तो उन्होंने अपने पहले बिजनेस की शुरुआत एक कूरियर कंपनी से की, जिसका नाम “Bundl” रखा गया। हालांकि यह कंपनी सफल नहीं हो सकी। लेकिन हार मानने वालों में से श्रीहर्ष नहीं थे। उन्होंने अपने मित्र नंदन रेड्डी के साथ मिलकर वर्ष 2014 में फूड डिलीवरी ऐप स्विगी की नींव रखी। इस ऐप के ज़रिए लोग बिना रेस्टोरेंट को फोन किए, सीधे अपने मोबाइल से खाना ऑर्डर कर सकते थे और डिलीवरी की झंझट से भी बच सकते थे।

कौन हैं नंदन रेड्डी

श्री हर्ष को मैनेजमेंट की अच्छी समझ थी, लेकिन तकनीकी ज्ञान उतना मज़बूत नहीं था। इसी कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने तीसरे मित्र नंदन को टीम में शामिल किया, जो कोडिंग में निपुण थे। इसके बाद तीनों ने मिलकर बेंगलुरु से स्विगी कंपनी की शुरुआत की।

स्विगी की आधिकारिक शुरुआत 6 अगस्त 2014 को हुई, लेकिन पहले दिन एक भी ऑर्डर नहीं मिला। टीम थोड़ी निराश ज़रूर थी, मगर श्रीहर्ष को पूरा भरोसा था कि हालात बदलेंगे। अगले ही दिन स्विगी को पहला ऑर्डर मिला और फिर धीरे-धीरे दो और ऑर्डर आने लगे। समय के साथ स्विगी का कारोबार बढ़ता गया और यह स्थानीय रेस्टोरेंट्स को ग्राहकों से जोड़ने में पूरी तरह सफल हो गया।

Jio ने स्विगी को जन-जन तक पहुंचाने में मदद की

कंपनी शुरू करने के 1 महीने में हर्ष के पास सिर्फ पांच डिलीवरी बॉय और 12 रेस्टोरेंट साथ में थे। देखते ही देखते 1 साल में इन्होंने 500 रेस्टोरेंट अपने साथ जोड़ने में सफलता हासिल कर ली। इसके बाद साल 2016 में एंट्री होती है जिओ की। जिसने भारत के टेलीकॉम सेक्टर में एक नई क्रांति ला दी। 



स्विगी का ऐप

इसी डिजिटल ट्रेंड ने स्विगी को रॉकेट जैसी रफ्तार दे दी। इस तेज़ी को भांपते हुए हर्ष ने स्विगी का मोबाइल ऐप भी लॉन्च कर दिया। इसके बाद कंपनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। स्विगी के उज्ज्वल भविष्य को देखते हुए निवेशकों ने भी भरोसा जताया और कंपनी को आसानी से 2 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिल गई।

स्विगी की वैल्यूएशन
साल 2022 तक स्विगी की वैल्यूएशन 10.7 बिलियन डॉलर तक पहुँच चुकी थी। वहीं दिसंबर 2024 तक इसमें जबरदस्त उछाल आया और कंपनी का मूल्य बढ़कर लगभग 1,32,800 करोड़ रुपये, यानी करीब 16 अरब डॉलर हो गया। इसके साथ ही स्विगी के सह-संस्थापक श्रीहर्ष मजेटी की कुल संपत्ति भी बढ़कर लगभग 1,400 करोड़ रुपये तक पहुँच चुकी है।

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