क्या कभी किसी ने कल्पना की होगी कि मात्र दस मिनट में आपका खाना दरवाज़े तक पहुँच जाएगा? बस एक फोन घुमाइए और कहीं दूर आपके लिए खाना तैयार होने लगेगा। कभी यह सोचना भी असंभव लगता था, लेकिन आज यह संभव कर दिखाया है हर्ष मजेटी ने । अपने पहले स्टार्टअप में असफलता के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और वर्ष 2014 में स्विगी की शुरुआत की। आज स्विगी 16 अरब डॉलर की एक विशाल कंपनी बन चुकी है। आइए जानते हैं इसकी प्रेरणादायक सफलता की कहानी। हर्ष की पढ़ाई-लिखाई आंध्र प्रदेश के एक डॉक्टर परिवार में जन्मे श्रीहर्ष के पिता रेस्टोरेंट व्यवसाय से जुड़े थे, जबकि उनकी माँ डॉक्टर थीं। घर में रेस्टोरेंट का माहौल होने के कारण उन्हें बचपन से ही खाने-पीने के कारोबार की समझ मिल गई। उन्होंने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, इसके बाद फिजिक्स में मास्टर डिग्री हासिल की और चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट (CFA) के सेकेंड लेवल की परीक्षा भी पास की। श्रीहर्ष का सपना हमेशा अपना खुद का बिजनेस शुरू करने का था, इसलिए उन्होंने आईआईएम कलकत्ता से मैनेजमेंट की डिग्री भी प्राप्त की। पढ़ाई पूर...
सफलता उम्र की मोहताज नहीं होती, यह बात मिसाल बनकर साबित की है बिहार के नालंदा जिले के 29 वर्षीय मिस्बाह अशरफ (Misbah Ashraf) ने। बार-बार असफल होने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी लगन, जुनून और दृढ़ इच्छाशक्ति से सफलता हासिल की। मिस्बाह की कड़ी मेहनत ने उन्हें फोर्ब्स की ‘फोर्ब्स 30 अंडर 30’ सूची में जगह दिलाई। महज 29 साल की उम्र में उन्होंने 2463 करोड़ रुपये की फिनटेक कंपनी खड़ी कर, अपनी सफलता की कहानी लिखी। उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि उम्र केवल एक संख्या है, अगर आप में जुनून और हौसला है तो आप बड़ी से बड़ी ऊंचाई हासिल कर सकते हैं। मिशबाह अशरफ का शुरुआती जीवन मिस्बाह अशरफ (Misbah Ashraf) बिहार के नालंदा जिले से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता एक साधारण शिक्षक हैं, और उन्होंने असफलताओं से लड़ते रहने की प्रेरणा अपने पिता से ही पाई। उनकी मां एक गृहिणी हैं, और उनकी शुरुआती शिक्षा नालंदा में ही हुई। मिडिल क्लास परिवार में पले-बढ़े मिस्बाह ने बचपन से ही बड़े सपने देखे थे। इन्हीं सपनों को साकार करने के लिए उन्होंने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया। हालांकि, उन्होंने...