कैसे बना एचडीएफसी बैंक भारत का भरोसेमंद बैंकिंग ब्रांड: आदित्य पुरी की दूरदर्शिता और लीडरशिप की दमदार गाथा
क्या आप विश्वास करेंगे कि एक व्यक्ति ने विदेश की शानदार नौकरी छोड़कर भारत में एक ऐसा बैंक खड़ा किया, जो आज भरोसे और मजबूती की मिसाल बन चुका है? सीमित संसाधन, ढेरों चुनौतियाँ और अनिश्चित भविष्य—इन सबके बीच एक सपना था, देश में वर्ल्ड-क्लास बैंक बनाने का। यह कहानी है साहस, विज़न और अटूट नेतृत्व की, जिसने भारतीय बैंकिंग जगत की दिशा ही बदल दी।
25 वर्ष पहले इस बैंक की स्थापना हुई थी, तब उनकी टीम में कई लोग ऐसे थे जो उम्र में बहुत युवा थे। कुछ साधारण मध्यमवर्गीय परिवारों से आते थे और साधारण जीवन जीते थे, जबकि कुछ सदस्य विदेशी कंपनियों में उच्च पदों पर कार्यरत थे। उस समय सभी के मन में एक ही सपना था—अपने देश में एक विश्वस्तरीय बैंक की स्थापना करना।
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एचडीएफसी बैंक का शुरुआती दौर बेहद चुनौतीपूर्ण था। संसाधनों की कमी के कारण बैंक ने कमला मिल्स में अपना कार्यालय शुरू किया। अक्सर अगली सुबह कर्मचारी जब दफ्तर आते, तो कंप्यूटर और मशीनें काम नहीं करती थीं, क्योंकि चूहों ने केबल कुतर दिए होते थे। यही नही प्रारंभिक समय में कर्मचारियों की ट्रेनिंग पेड़ों के नीचे होती थी। फिर भी अपने दृढ़ संकल्प के बल पर आदित्य पुरी अपने निर्णय पर अडिग रहे और आज उसी मेहनत का परिणाम है कि वे इस मुकाम तक पहुंचे हैं।
आदित्य पुरी का प्रारंभिक जीवन
आदित्य पुरी का जन्म 1950 में हुआ। बचपन से ही वे अनुशासनप्रिय, मेहनती और लक्ष्य के प्रति स्पष्ट सोच रखने वाले थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद वाणिज्य (कॉमर्स) में स्नातक की पढ़ाई की और आगे चलकर प्रबंधन की पढ़ाई की। शिक्षा के दौरान ही उनमें वित्त और प्रबंधन के क्षेत्र में गहरी रुचि विकसित हो गई थी।
ऐसे हुई HDFC बैंक की शुरुआत
HDFC Bank की स्थापना 1990 के दशक में Aditya Puri ने की थी। वे मलेशिया में Citibank की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर भारत लौटे थे। लगभग दो दशकों की मेहनत और दूरदृष्टि के बल पर उन्होंने बैंक को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके नेतृत्व में बैंक लगातार मुनाफे में रहा और सबसे कम एनपीए वाले बैंकों में शामिल हो गया।
बने देश के सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले बैंकर
एचडीएफसी बैंक के एमडी और सीईओ के रूप में आदित्य पुरी भारत के सबसे अधिक वेतन पाने वाले बैंकरों में रहे। एक वित्त वर्ष में उनकी सैलरी और अन्य लाभ 38 प्रतिशत बढ़कर 18.92 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, उसी अवधि में शेयर ऑप्शंस के इस्तेमाल से उन्हें 161.56 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्त हुए थे।
टेक्नोलॉजी और भरोसे का मेल
एचडीएफसी बैंक ने शुरू से ही आधुनिक तकनीक को अपनाया। डिजिटल बैंकिंग, मजबूत जोखिम प्रबंधन और कम एनपीए (Non-Performing Assets) इसकी पहचान बने। ग्राहक भरोसा इस बैंक की सबसे बड़ी पूंजी बना।
ब्रांड बनाने की पूरी आज़ादी
बैंक को Deepak Parekh के नेतृत्व में वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में एक मजबूत ब्रांड की विरासत मिली थी। दीपक पारेख भारत के प्रमुख उद्योगपति और बैंकरों में से एक थे। वे Housing Development Finance Corporation (HDFC Ltd.) के लंबे समय तक चेयरमैन रहे। उनके नेतृत्व में एचडीएफसी ने भारत में हाउसिंग फाइनेंस को संगठित और विश्वसनीय स्वरूप दिया।
आदित्य पुरी की कहानी हमें यह सिखाती है कि सच्ची सफलता केवल बड़े सपने देखने से नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए जोखिम उठाने, धैर्य रखने और लगातार मेहनत करने से मिलती है। एक स्पष्ट विज़न, मजबूत टीम और अटूट आत्मविश्वास के साथ उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उनकी यात्रा हर युवा उद्यमी और प्रोफेशनल के लिए प्रेरणा है कि हालात चाहे जैसे भी हों, सही नेतृत्व और दृढ़ संकल्प से नई ऊंचाइयाँ जरूर हासिल की जा सकती हैं।


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