सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Travis Kalanick की प्रेरणादायक कहानी: संघर्ष से शुरू हुई Uber Ride कैसे बनी दुनिया की सबसे बड़ी राइड-शेयरिंग कंपनी

जब दुनिया में लोग रोज़ाना टैक्सी पाने के लिए सड़कों पर इंतज़ार कर रहे थे , देर और असुविधा को अपनी किस्मत मान चुके थे , तब एक व्यक्ति के दिमाग में एक सवाल उठा — क्या ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह बदला जा सकता है ? यही सवाल आगे चलकर एक बड़े बिज़नेस क्रांति की शुरुआत बना। यह कहानी है Travis Kalanick की , जिसने एक साधारण सी समस्या को देखा और उसे एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन में बदल दिया। उनकी सोच ने साबित किया कि अगर आइडिया सही हो , तो पूरी इंडस्ट्री की दिशा बदली जा सकती है। प्रस्तावना Travis Kalanick एक अमेरिकी उद्यमी हैं , जिन्होंने टेक्नोलॉजी की दुनिया में राइड-शेयरिंग की अवधारणा को नया रूप दिया। वे Uber के सह-संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं , जिसने शहरी परिवहन प्रणाली को पूरी तरह बदल दिया और लोगों के यात्रा करने के तरीके को आसान बना दिया। उनका जीवन केवल सफलता की कहानी नहीं है , बल्कि संघर्ष , असफलताओं और लगातार सीखने की प्रक्रिया का उदाहरण भी है। शुरुआती दौर में कई स्टार्टअप्स असफल हुए , लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय नए विचारों के साथ आगे बढ़ना जारी रखा। इसी सोच और ...

इन्वर्टर मैन कुंवर सचदेवा: कैसे घर-घर पेन बेचने वाला लड़का बन गया इन्वर्टर मैन, पढ़िए रोचक किस्सा

 

इन्वर्टर मैन कुंवर सचदेवा

लगन और इच्छा शक्ति इंसान के पास ऐसे दो औजार हैं जिनके बल पर वह दुनिया की किसी भी चीज को पा सकता है। पूरे दृढ़ इच्छा और लगन के साथ कोई भी काम किया जाए तो सफल होने से कोई नही रोक सकता। इसके अलावा धैर्य इंसान को विपरीत परिस्थितियों में भी टिके रहने का साहस देता है। परिस्थितियां चाहे जैसी हो लगातार आगे बढ़ता रहना चाहिए।

कुछ ऐसी ही कहानी है Su-Kam Inverter के जनक कुंवर सचदेवा की। जिन्होंने आर्थिक अभाव को कभी भी सफलता की राह में आड़े नही आने दिया। आज यह कंपनी दुनिया के करीब 70 से ज्यादा देशों में कारोबार कर रही है । कंपनी का टर्नओवर करीब 29 बिलियन डॉलर है। तो आप जान ही गए होगें की आज हम बात करने वाले हैं कुंवर सचदेवा की।

प्रारंभिक जीवन

कुंवर सचदेवा का जन्म 1962 में दिल्ली के एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके तीन भाई हैं और पिता रेलवे में सेक्शन ऑफिसर थे। उस समय सेक्शन ऑफिसर कोई बड़ी पोस्ट नही हुआ करती थी। इस लिहाज से घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नही थी। यही कारण था कि कुंवर सचदेवा जब पांचवी कक्षा में थे तब उनके पिता ने उन्हें प्राइवेट स्कूल से निकाल कर सरकारी स्कूल मे दाखिला करवा दिया।

यह भी पढ़ें- कैसे नोटबंदी के दौर ने बदल दी पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा की किस्मत, पढ़िए उनसे जुड़े कुछ अनसुने किस्से

कहा जाता है कि कुंवर जब दसवीं में थे तब वह अपने भाईयों के साथ घर-घर जाकर पेन बेचा करते थे और पैसों से अपनी पढ़ाई का सामान खरीद लेते थे। उसके बाद उन्होंने यह काम छोड़ कर एक केबल टीवी वाले के पास नौकरी कर ली और घर-घर जाकर टीवी केबल लगाने लगे। साथ ही वह दिल्ली यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक में इंजिनयर की डिग्री हासिल करने में कामयाब रहे। 


 

Su-Kam की स्थापना

कुंवर सचदेवा ने कुछ समय बाद केवल टीवी का काम छोड़ दिया और वर्ष 1988 में नौकरी से इकट्ठा किए गए 10 हजार रुपए से एक खुद की दुकान खोली जिसका नाम रखा Su-Kam और फिर वह खुद केबल डिसट्रिब्यूट करने लगे।  उन दिनों इन्वर्टर बनाने वाली कंपनी देश क्या विदेशों में भी नही थी, यहीं से कुंवर सचदेवा के मन में विचार आया कि क्यों inverter बनाने काम शुरु किया जाए। बस वहीं से उनकी सफलता की शुरुआत हुई, उन्होंने कुछ अच्छे इंजीनियरों को अपने साथ जोड़ा और छोटे स्तर पर inverter बनाने का काम शुरु किया। 

inverter बनाने का काम करते समय कई लोगों ने उन्हें रोका भी कि आपको इस बिजनेस की कोई समझ नही है इसलिए इसमें सफल होने की गुंजाइश न के बराबर है। हांलाकि वह अपने जिद पर अड़े रहे और बहुत ही जल्दी वह अपने इंजीनियरों की मदद से काफी अच्छे इन्वर्टर मार्केट में लाने में कामयाब रहे। सबसे बड़ी बात तो यह थी कि उनके बनाए यह इन्वर्टर लोगों को काफी पसंद आए और उनका बिजनेस चल निकला। कुंवर सचदेवा जल्द ही पूरे भारत में अपना कारोबार जमाने में सफलता प्राप्त कर ली।

Su-Kam Inverter की सफलता

आज भारत में ही नही बल्कि दुनिया के 70 देशों में कुंवर सचदेवा का कारोबार फैला हुआ है। सचदेवा प्लास्टिक बॉडी से इन्वर्टर का आविष्कार करने वाले विश्व के पहले व्यक्ति हैं । वह लीडिंग पॉवर सॉल्यूशन कंपनी Su-Kam सोलर इन्वर्टर के एम डी और संस्थापक हैं साथ ही वह एक महान खोजकर्ता, प्रेरणादायक वक्ता और मार्केटर भी हैं। आज Su-Kam भारत की सबसे तेजी से बढ़ने वाली इंडस्ट्री है। सचदेवा की कंपनी की सफलता की कहानी 'मेक इन इंडिया' का प्रत्यक्ष उदाहरण है।


 

कुंवर सचदेवा की इच्छा है कि भारत में हर जगह ग्रीन एनर्जी का व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए । बता दें कि यूनिक सोलर DC सिस्टम के निर्माण में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने बहुत छोटे हाउस रिमोट से लेकर बड़ी इंडस्ट्री के लिए भी सोलर उपकरणों की खोज की है। उनके इस योगदान की वजह से उन्हें The Solar man of India  के नाम से भी संबोधित किया जाता है।

कुंवर सचदेवा की आसाधरण प्रतिभा और बिजनेस सोच को भारत सरकार ने भी सम्मानित किया है। उन्हें भारत शिरोमणि एवं youngest and Young के साल के 'सर्वश्रेष्ठ उद्योगपति अवार्ड' से सम्मानित किया गया है। कुंवर सचदेवा की कहानी सभी के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। उन्होंने अपने बिजनेस की सफलता की कहानी खुद लिखी। 

उनकी तरह अगर आप भी अपना स्टार्टअप शुरु करना चाहते हैं और कैरियर में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो उनसे सीख लेकर आप आगे बढ़ सकते हैं।


 

 

 

 

टिप्पणियाँ

  1. For large-scale projects, you can order high-capacity solar inverters in Pakistan built for commercial and industrial setups. These models support three-phase systems, advanced monitoring, and heavy load management for continuous performance.

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

रिटेल किंग किशोर बियानी: कैसे उन्होंने Big Bazaar को आम आदमी का स्टोर बनाया

किशोर बियानी की सफलता की कहानी भारत में आधुनिक रिटेल क्रांति की नींव रखने की दास्तान है। उन्होंने बिग बाज़ार (Big Bazaar) जैसे डिस्काउंट हाइपरमार्केट और पैंटालून्स जैसे लोकप्रिय ब्रांड शुरू करके देश में खरीदारी के तौर-तरीके बदल दिए। 1987 में पैंटालून्स से शुरुआत कर उन्होंने फ्यूचर ग्रुप का विस्तार किया, जिसने भारतीय मध्यम वर्ग को एक ही जगह पर विविध उत्पादों की सुविधा दी। बिग बाजार एक ऐसा रिटेल मार्केट हैं जहां एक ही छत के नीचे व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जरुरती चीजोंं को खरीद सकता है । यह खासकर मध्यमवर्गीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है ।  किशोर बियानी की जीवनी किशोर बियानी का जन्म 9 अगस्त 1961 को मुंबई में एक कपड़ा व्यवसायी परिवार में हुआ। शुरू से ही उन्हें अपने पारिवारिक बिजनेस में गहरी दिलचस्पी थी। 1987 में उन्होंने पारंपरिक कपड़ा व्यवसाय को नया रूप देते हुए इसे रेडीमेड परिधान उद्योग की ओर मोड़ दिया। किशोर बियानी वह नाम हैं जिन्हें भारत में आधुनिक रिटेल का अग्रदूत माना जाता है। ‘रिटेल किंग’ के नाम से प्रसिद्ध बियानी ने खरीदारी को सरल और सुलभ बनाकर आम लोगों तक पहुंचाया। फ्यूचर ग्रुप ...

भाविश अग्रवाल ने कैसे OLA को बना दिया इंडिया का ब्रांड..पढ़िए रोचक यात्रा

  भारत ने हाल ही में एक बहुत बड़ा बदलाव देखा है, जो बेहद कम समय में हुआ। अब आप इंटरनेट के जरिए किराने का सामान मंगवा सकते हैं, खाना सीधे आपके दरवाजे तक पहुंच सकता है, और बिना गैस पेडल दबाए अपने शहर के सबसे दूरस्थ कोने तक पहुंच सकते हैं। ओला कैब्स, जिसे भाविश अग्रवाल ने सह-स्थापित किया था, अब ओला कंज्यूमर बन चुकी है। इसने भारत में ग्राहकों को लंबी कतारों में खड़े होने, घंटों तक इंतजार करने, या ऑटोवाले द्वारा अनदेखा किए जाने जैसी समस्याओं को हल किया है। इसके अलावा, इसने महिलाओं के लिए दिन के किसी भी समय यात्रा को सुरक्षित बना दिया है। फोटोग्राफी के शौकीन अग्रवाल का सपना भारतीयों को सुरक्षित और भरोसेमंद कैब सेवा प्रदान करना था, और उन्होंने यह सब कम उम्र में ही हासिल किया। अग्रवाल ओला के सह-संस्थापक और सीईओ हैं, और ओला इलेक्ट्रिक के एकमात्र संस्थापक भी हैं। इस सफल कैब सेवा का पहला प्रयोग दिल्ली की सड़कों पर किया गया। भाविश अग्रवाल ने अंकित भाटी के साथ मिलकर ओला की स्थापना की, और इसके बाद जो कुछ भी हुआ, वह इतिहास बन गया। प्रारंभिक जीवन भाविश अग्रवाल, जिन्हें अक्सर मारवाड़ी समझा जाता है,...

कैसे एक छोटे आइडिया ने बदली दुनिया: Startup-Airbnb की धमाकेदार कहानी

क्या आप सोच सकते हैं कि एक छोटा सा कमरा और कुछ एयर मैट्रेस आपकी जिंदगी बदल सकते हैं ? Brian Chesky ने इसी साधारण आइडिया को अपनाकर एक ऐसा बिजनेस खड़ा किया , जिसने पूरी दुनिया के रहने और यात्रा करने के तरीके को बदल दिया। जब जेब खाली हो , किराया देने के पैसे न हों और हर रास्ता बंद दिखे — तभी असली सोच जन्म लेती है। Airbnb की शुरुआत भी एक ऐसी ही मजबूरी से हुई , जिसने बाद में अरबों डॉलर का साम्राज्य खड़ा कर दिया। प्रस्तावना Brian Chesky एक साधारण परिवार से आने वाले व्यक्ति थे , लेकिन उनके सपने हमेशा बड़े रहे। बचपन से ही उन्हें कला और डिज़ाइन में गहरी रुचि थी , जो उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती थी। यही रचनात्मक सोच आगे चलकर उनके बिजनेस आइडियाज की नींव बनी। उन्होंने Rhode Island School of Design से अपनी पढ़ाई पूरी की , जहां उन्होंने प्रोडक्ट डिज़ाइन सीखा। इस दौरान उन्होंने सीखा कि किसी भी समस्या को अलग नज़रिए से कैसे देखा जाए और उसे एक अवसर में बदला जाए। यही सोच उनकी सफलता का सबसे बड़ा कारण बनी। जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। किराया दे...