संक्षिप्त परिचय
भारत में कभी चश्मा खरीदना एक झंझट भरा और महंगा अनुभव था। सीमित डिज़ाइन, ऊँची कीमतें और लोकल दुकानों पर निर्भरता। ऐसे समय में ने सोचा एक युवा बिजनेस मैन ने सोचा “क्यों न इसे ऑनलाइन और किफायती बनाया जाए?” यहीं से शुरू हुई Lenskart की क्रांतिकारी यात्रा।
तो आज हम बात करने जा रहे
हैं लेंसकार्ट के संस्थापक कि जिसने विदेशी नौकरी छोड़कर भारत में चश्मा उद्योग को पूरी तरह
बदल दिया और आज उनकी कंपनी अरबों की बन चुकी है। यह कहानी है पीयूष बंसल की – जिन्होंने “देखने” के तरीके को ही बदल दिया।
पीयूष बंसल द्वारा सह-स्थापित लेंसकार्ट भारत में चश्मे के असंगठित बाज़ार को ऑनलाइन लाकर एक प्रमुख 'यूनिकॉर्न' ब्रांड बन गया है। 2010 में शुरू हुई इस कंपनी ने क्वालिटी, किफायती दाम और 3D ट्राई-ऑन जैसी तकनीक (Home Eye Check-up) के जरिए लोगों के चश्मा खरीदने का तरीका बदल दिया। आज इसके 1550+ आउटलेट हैं और यह भारत का सबसे बड़ा आईवियर ब्रांड है।
पीयूष बंसल का प्रारंभिक जीवन
पीयूष बंसल ने अपनी शुरुआती शिक्षा दिल्ली के डॉन बॉस्को स्कूल से पूरी की। 12वीं कक्षा के बाद उन्होंने आईआईटी में प्रवेश पाने के लिए तैयारी की, लेकिन उन्हें दाखिला नहीं मिल सका। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने का निर्णय लिया।
उन्होंने कनाडा के मैकगिल विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल आईटी, कंट्रोल एंड ऑटोमेशन में ग्रेजुएशन किया। वर्ष 2006 में बैचलर डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत करने के लिए नौकरी की तलाश शुरू कर दी।
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रिसेप्शनिस्ट की नौकरी
बैचलर डिग्री पूरी करने के बाद पीयूष बंसल ने अपने खर्चों को संभालने के लिए एक कोडिंग कंपनी में रिसेप्शनिस्ट
के रूप में काम शुरू किया। इसी दौरान वहां के एक वरिष्ठ सहयोगी ने उन्हें कोडिंग सीखने का अवसर दिया।
कोडिंग में दक्षता हासिल करने के बाद उन्होंने
Microsoft में इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया। माइक्रोसॉफ्ट में काम करते हुए उन्होंने तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ मूल्यवान अनुभव भी प्राप्त किया, जिसने उनके करियर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
खुद का काम शुरू करने का फैसला
साल 2007 में Microsoft में नौकरी करने के बाद पीयूष बंसल ने लगभग एक वर्ष बाद नौकरी छोड़ दी और उद्यमिता की राह चुनने का निर्णय लिया। इसी दौरान वे भारत लौट आए और अपने स्टार्टअप सफर की शुरुआत की।
पीयूष बंसल ने वर्ष 2007 में SearchMyCampus को अपनी पहली व्यावसायिक पहल के रूप में शुरू किया जो छात्रों को कोचिंग, रहने के लिए घर और नौकरी जैसी सुविधाएं खोजने में मदद करती थी। इसके बाद उन्होंने John Jacobs और Equivalence जैसी कंपनियों की स्थापना की। हालांकि उन्हें सफलता मिली Lenskart से ।
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लेंसकार्ट की स्थापना
साल 2010 में पीयूष बंसल ने सुमीत कपाही और अमित चौधरी के साथ मिलकर Lenskart की नींव रखी। प्रारंभिक दौर में यह कंपनी केवल कॉन्टैक्ट लेंस की बिक्री तक सीमित थी, लेकिन बाद में इसने अपने उत्पादों का विस्तार किया और समय के साथ इसने चश्मे और सनग्लासेस भी बनाना शुरू कर दिया।
आज Lenskart के पोर्टफोलियो में 5000 से अधिक फ्रेम और चश्मों की डिज़ाइन उपलब्ध हैं, साथ ही 50 से ज्यादा प्रकार के उच्च गुणवत्ता वाले लेंस भी शामिल हैं। निरंतर नवाचार और ग्राहक-केंद्रित रणनीति के कारण कंपनी सफलता की नई ऊँचाइयों को छू चुकी है।
वर्तमान में पूरे भारत में Lenskart के 1550 से अधिक आउटलेट संचालित हो रहे हैं। फ्रेंचाइज़ी मॉडल अपनाकर पीयूष बंसल ने इस ब्रांड को देश के हर कोने तक पहुंचाया। आज कंपनी चश्मों की बिक्री के साथ-साथ पेशेवर आंखों की जांच (आई-टेस्ट) की सुविधा भी प्रदान करती है।
लेंसकार्ट की सफलता के राज
टेक्नोलॉजी का उपयोग
Lenskart ने AI आधारित फेस-स्कैन, वर्चुअल ट्रायल और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर ग्राहक अनुभव को अधिक आसान और व्यक्तिगत बनाया। इन नवाचारों ने ऑनलाइन चश्मा खरीदने की प्रक्रिया को भरोसेमंद और सुविधाजनक बना दिया।
मजबूत ब्रांडिंग
कंपनी ने Katrina Kaif को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाकर युवाओं के बीच मजबूत पहचान स्थापित की। प्रभावी मार्केटिंग रणनीति और आकर्षक विज्ञापनों ने ब्रांड को राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बना दिया।
Turning Point (बड़ा बदलाव)
- घर पर फ्री आई-चेकअप
- 3D ट्राय
फीचर
- किफायती और स्टाइलिश फ्रेम
- “Buy 1 Get 1” ऑफर
इन इनोवेशन ने Lenskart को आम लोगों का ब्रांड बना दिया।
निवेश और विस्तार
मजबूत निवेश और रणनीतिक विस्तार के जरिए Lenskart ने देशभर में अपने स्टोर नेटवर्क को तेजी से बढ़ाया। फ्रेंचाइज़ी मॉडल और टेक्नोलॉजी सपोर्ट के साथ कंपनी ने राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
पेयुष बंसल ने शुरुआत में कई असफलताएँ
देखीं। पहले उनका स्टार्टअप
सफल नहीं हुआ। लेकिन उन्होंने
हार नहीं मानी। उन्होंने
मार्केट की असली समस्या समझी — “लोगों को सस्ता और स्टाइलिश चश्मा चाहिए।” उन्होंने
सप्लाई चेन खुद कंट्रोल की, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई और लागत कम की। धीरे-धीरे लेंसकार्ट
भारत का सबसे बड़ा आईवियर ब्रांड बन गया।
Shark Tank से पहचान
जब पीयूष बंसल ने Shark Tank India में जज के रूप में हिस्सा लिया, तब वे एक बड़े बिजनेस आइकॉन के रूप में उभरे।
उन्होंने
नए स्टार्टअप्स
में निवेश किया और युवाओं को प्रेरित किया कि “सपने बड़े देखो।”
लेंसकार्ट की सफलता हमें सिखाती है —
समस्या को पहचानो
टेक्नोलॉजी का सही उपयोग करो
कस्टमर एक्सपीरियंस को प्राथमिकता दो
अगर विज़न साफ हो, तो सफलता भी साफ दिखाई देती है।
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