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जनवरी, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Marketing और PR Agency: कम निवेश में शुरू करें प्रॉफिटफुल बिजनेस

  आज के डिजिटल युग में हर कंपनी , ब्रांड और स्टार्टअप की सबसे बड़ी जरूरत है दिखना और पहचाना जाना । अगर किसी बिजनेस के पास अच्छा प्रोडक्ट है लेकिन लोगों तक उसकी जानकारी नहीं पहुँचती , तो वह बिजनेस ज्यादा समय तक टिक नहीं पाता। यहीं से Marketing और Public Relations Agency की भूमिका शुरू होती है। कल्पना कीजिए कि कोई नया स्टार्टअप बाजार में आया है। उसके पास शानदार प्रोडक्ट है लेकिन ग्राहक उसे जानते ही नहीं। ऐसे समय में एक Marketing या PR Agency उस ब्रांड की कहानी बनाती है , उसे सोशल मीडिया , न्यूज़ मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहचान दिलाती है। आज की दुनिया में कंपनियां अपने प्रोडक्ट से ज्यादा ब्रांड इमेज और पब्लिक रिलेशन पर खर्च कर रही हैं। इसलिए Marketing और Public Relations Agency का बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है और यह कम निवेश में शुरू होने वाला हाई-प्रॉफिट बिजनेस बन चुका है। प्रस्तावना Marketing और Public Relations Agency वह बिजनेस है जो कंपनियों , ब्रांड्स और व्यक्तियों की ब्रांडिंग , प्रमोशन और पब्लिक इमेज मैनेजमेंट का काम करता है। इसका मुख्य उद्देश्य होता है किसी...

इन्वर्टर मैन कुंवर सचदेवा: कैसे घर-घर पेन बेचने वाला लड़का बन गया इन्वर्टर मैन, पढ़िए रोचक किस्सा

  इन्वर्टर मैन कुंवर सचदेवा लगन और इच्छा शक्ति इंसान के पास ऐसे दो औजार हैं जिनके बल पर वह दुनिया की किसी भी चीज को पा सकता है। पूरे दृढ़ इच्छा और लगन के साथ कोई भी काम किया जाए तो सफल होने से कोई नही रोक सकता। इसके अलावा धैर्य इंसान को विपरीत परिस्थितियों में भी टिके रहने का साहस देता है। परिस्थितियां चाहे जैसी हो लगातार आगे बढ़ता रहना चाहिए। कुछ ऐसी ही कहानी है Su-Kam Inverter के जनक कुंवर सचदेवा की। जिन्होंने आर्थिक अभाव को कभी भी सफलता की राह में आड़े नही आने दिया। आज यह कंपनी दुनिया के करीब 70 से ज्यादा देशों में कारोबार कर रही है । कंपनी का टर्नओवर करीब 29 बिलियन डॉलर है। तो आप जान ही गए होगें की आज हम बात करने वाले हैं कुंवर सचदेवा की। प्रारंभिक जीवन कुंवर सचदेवा का जन्म 1962 में दिल्ली के एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके तीन भाई हैं और पिता रेलवे में सेक्शन ऑफिसर थे। उस समय सेक्शन ऑफिसर कोई बड़ी पोस्ट नही हुआ करती थी। इस लिहाज से घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नही थी। यही कारण था कि कुंवर सचदेवा जब पांचवी कक्षा में थे तब उनके पिता ने उन्हें प्राइवेट स्कूल से निकाल कर सरकारी स्क...

कैसे नोटबंदी के दौर ने बदल दी पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा की किस्मत, पढ़िए उनसे जुड़े कुछ अनसुने किस्से..

  कहावत है कि कुछ कर गुजरने का जुनून इंसान को दुनिया से अलग पंक्ति में ला कर खड़ा कर देता है। विजय शेखर शर्मा भारत के उन चुनिंदा लोगों मे से हैं जिन्होंने दुनिया से अलग खड़े होकर बता दिया कि अगर इंसान के अंदर जज्बा हो तो वह कुछ भी कर सकता है। आज हम बात करने वाले हैं पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा के बारे  में जिन्होंने असफलताओं से लड़ कर कामयाबी के उस मुकाम पर पहुंचे जहां तक पहुंचना केवल सपने देखने जैसा होता है। प्रारंभिक जीवन पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. उनके पिताजी एक स्कूल टीचर जबकि माता गृहिणी थीं।  विजय शेखर शर्मा की शुरुआती पढ़ाई अलीगढ़ के कस्बे हरदुआगंज के एक हिंदी मीडियम स्कूल में हुई। हिंदी मीडियम यहां इस लिए बता रहा हूं , क्योंकि हमारे देश में अधिकतर लोगों को यह भ्रम है कि इंग्लिश मीडियम में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य उज्जवल होता है। इसके बाद विजय शेखर शर्मा ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए दिल्ली चले गए और दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बैचलर ऑफ इंजीनिंयरिंग की डिग्री इलेक्ट्रॉ...

एक साधारण परिवार में जन्मे गौतम अडानी कैसे बने दुनिया के तीसरे सबसे अमीर शख्स, जानिए उनके बेहतरीन किस्से

आज हम Story behind the Success के अंतर्गत एक ऐसे शख्स के बारे में बात करेगें जिन्होंने अपनी बिजनेस स्ट्रेटजी से पूरी दुनिया को लोहा मनवाया। गौतम अडानी आज से कुछ सालों पहले तक एक सामान्य बिजनेस मैन की श्रेणी में थे लेकिन उन्होंने भारतीय बिजनेस जगत में पिछले कुछ सालों में ऐसे बेंच मार्क स्थापित किए हैं जिसकी कायल पूरी दुनिया हो चुकी है। गौतम अडानी के बारे में कहा जाता है कि एक वक्त ऐसा था जब आर्थिक तंगी के कारण उन्हें पढ़ाई तक छोड़नी पड़ी थी लेकिन आज वह एयरपोर्ट से लेकर बंदरगाह और कोयले से लेकर घर में इस्तेमाल होने वाले तेल तक के बेताज बादशाह हैं। तो क्या है एक सफल उद्यमी गौतम अडानी के कामयाबी के राज आइए जानते हैं। प्रारंभिक जीवन गौतम अडानी का जन्म अहमदबाद के निकट थराड़ कस्बे में 24 जून 1962 को हुआ था। वह सात भाई-बहन थे। बहुत कम लोगो को यह पता होगा कि अडानी का परिवार आर्थिक रूप से बहुत कमजोर था, यही कारण था कि उनका परिवार अहमदाबाद के पोल इलाके के शेठ चॉल में रहता था। गौतम अडानी ने अहमदाबाद के सेठ चिमनलाल नागदास विद्यालय से स्कूली शिक्षा हासिल की. हांलाकि आर्थिक तंगी के कारण वह ज्यादा पढ़ा...